का सरल उत्तर
सत्यलोक से वैकुंठ 2,62,00,000 योजन ऊपर है। सूर्य से ब्रह्मांड के अंतिम आवरण तक कुल 26 करोड़ योजन है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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