का सरल उत्तर
सौभाग्य = लौकिक सुख-धन नहीं, बल्कि जीव की आंतरिक शक्ति, मानसिक शुद्धता, आत्मिक अनुशासन और वह ब्रह्मज्ञान जो जन्म-मरण के चक्र से मुक्त करता है। कुंडलिनी जाग्रत हुए बिना बाहरी धन केवल अशांति देता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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