का सरल उत्तर
यह व्रत कर्मों की शुद्धि, पूर्वजन्म के पापों के प्रायश्चित, और शनि के प्रतिकूल प्रभावों (जैसे साढ़ेसाती और ढैया) को शांत कर वैराग्य और अनुशासन प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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