का सरल उत्तर
शास्त्रों में प्राण त्याग के लिए शय्या के बजाय गोमय-लेपित भूमि और कुशा का विधान है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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