का सरल उत्तर
भागवत कथा सुनने का कोई कठोर तिथि-नियम नहीं है, इसे कभी भी सुना जा सकता है। श्रद्धा, एकाग्र मन, सात्विकता और ब्रह्मचर्य का पालन मुख्य नियम हैं। केवल सुनना नहीं, बल्कि सुनी बात पर मनन करना और आचरण में उतारना भी आवश्यक है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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