संध्या वंदन छोड़ने का क्या पाप लगता है शास्त्रों में?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
संध्या छोड़ना: मनुस्मृति — 'शूद्रवत्' (कर्तव्यच्युत)। 3 दिन छोड़ने = 'पतित।' नित्य कर्म = प्राणवत्। व्यावहारिक: न कर सकें = गायत्री 108 जप/दिन। सरल संध्या = स्नान+आचमन+गायत्री+सूर्य अर्घ्य (10-15 मिनट)।
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वैदिक कर्मकांड
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