का सरल उत्तर
शतपथ ब्राह्मण के अनुसार स्वर्ण की उत्पत्ति अग्निदेव के वीर्य से हुई — जब अग्निदेव ने जलों से संयोग किया तब उनका तेज 'सुवर्ण' बना। इसीलिए यह अग्नि जैसा देदीप्यमान और कभी मलिन न होने वाला है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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