तांत्रिक साधक के लिए श्मशान एक सिद्ध-पीठ है — यहाँ भौतिक और सूक्ष्म जगत के बीच का पर्दा क्षीण होता है, सभी रूप-पहचान भस्म होते हैं और केवल चैतन्य शेष रहता है।
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