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सरल उत्तर

तंत्र में प्रायश्चित्त कर्म कब करना चाहिए?

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गलत उच्चारण, अनुष्ठान भंग (व्रत/नियम), अशुद्धि, अधूरा अनुष्ठान, षट्कर्म दुरुपयोग, प्रत्येक पूजा अंत। विधि: गायत्री 1008/मूल 108/हवन 108/दान। 'गलती→प्रायश्चित्त→शुद्ध→आगे।'

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सरल उत्तर: तंत्र में प्रायश्चित्त कर्म कब करना चाहिए?