तंत्र में प्रायश्चित्त कर्म कब करना चाहिए?
की चेकलिस्ट
गलत उच्चारण, अनुष्ठान भंग (व्रत/नियम), अशुद्धि, अधूरा अनुष्ठान, षट्कर्म दुरुपयोग, प्रत्येक पूजा अंत। विधि: गायत्री 1008/मूल 108/हवन 108/दान। 'गलती→प्रायश्चित्त→शुद्ध→आगे।'
- 1मंत्र उच्चारण गलत: शुद्ध उच्चारण → प्रायश्चित्त जप (11/108 बार अतिरिक्त)।
- 2अनुष्ठान भंग: व्रत/नियम टूटे (ब्रह्मचर्य/आहार) → प्रायश्चित्त हवन।
- 3अशुद्धि: जप/पूजा में अशुद्ध अवस्था → शुद्धि + प्रायश्चित्त।
- 4अनुष्ठान अधूरा: संकल्प पूर्ण न हो → प्रायश्चित्त + पुनः अनुष्ठान।
- 5षट्कर्म दुरुपयोग: तामसिक कर्म किया → प्रायश्चित्त = गुरु निर्देश।
- 6प्रत्येक पूजा अंत: 'मंत्रहीनं क्रियाहीनं...' = नियमित प्रायश्चित्त।
सम्पूर्ण उत्तर
विस्तृत प्रश्न पृष्ठ देखें
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
श्रेणी
तंत्र साधना
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।