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सरल उत्तर

तंत्र साधना का अंतिम लक्ष्य क्या है?

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तंत्रालोक: परम लक्ष्य = शिव-शक्ति-ऐक्य-साक्षात्कार। तीन स्तर: भोग (सकाम — रोग-धन), मुक्ति (मध्यम), शिव-शक्ति ऐक्य (परम)। तंत्र की विशेषता: संसार-त्याग नहीं — संसार-रूपांतरण। 'देह = मंदिर, जीव = देव' (कुलार्णव)। फल: जीवनमुक्ति — शरीर में रहकर मुक्त।

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