का सरल उत्तर
त्रिपुर भैरवी उसी का संहार करती हैं जो साधक की उन्नति में बाधक है — चाहे बाहरी शत्रु हो या भीतरी विकार (काम, क्रोध आदि)।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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