वैदिक काल में संध्या वंदन कैसे की जाती थी?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
वैदिक संध्या: त्रिसंध्या (अनिवार्य), नदी स्नान, गायत्री 1008 (स्वर-कठोर), सूर्य उपस्थान (खड़े), अग्निहोत्र (दूध/घी — अग्नि सदा प्रज्वलित), मार्जन, प्राणायाम, अघमर्षण। आज सरलीकृत — मूल तत्व (स्नान+गायत्री+अर्घ्य) वही।
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वैदिक कर्मकांड
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