का सरल उत्तर
वासुकि गायत्री मंत्र: 'ॐ सर्पराजाय विद्महे, पद्म हस्ताय धीमहि, तन्नो वासुकि प्रचोदयात्' — यह शिव के नाग वासुकि की शक्ति को साधक में प्रतिष्ठित करता है।
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