का सरल उत्तर
नवरात्रि के पाँचवें दिन: साधक का मन विशुद्ध चक्र में अवस्थित होता है। स्कंदमाता की कृपा से → अलौकिक शांति और सुख का अनुभव।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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