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पवित्र ग्रंथ

भगवद्गीता — श्लोक और अर्थ सहित

श्रीमद्भगवद्गीता के अठारह अध्यायों के सभी श्लोक — मूल संस्कृत, हिन्दी अनुवाद और भावार्थ सहित।

रचयिता — महर्षि वेद व्यास  ·  कुल 701 पद/श्लोक

भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय

अठारह अध्यायों के सात सौ श्लोक — मूल संस्कृत, हिन्दी अनुवाद और भावार्थ।

भगवद्गीता

अर्जुन विषाद योग

Arjuna Vishada Yoga

47 पद/श्लोकपढ़ें
भगवद्गीता

सांख्य योग

Sankhya Yoga

72 पद/श्लोकपढ़ें
भगवद्गीता

कर्म योग

Karma Yoga

43 पद/श्लोकपढ़ें
भगवद्गीता

ज्ञान कर्म संन्यास योग

Jnana Karma Sanyasa Yoga

42 पद/श्लोकपढ़ें
भगवद्गीता

कर्म संन्यास योग

Karma Sanyasa Yoga

29 पद/श्लोकपढ़ें
भगवद्गीता

आत्म संयम योग

Atma Samyama Yoga

47 पद/श्लोकपढ़ें
भगवद्गीता

ज्ञान विज्ञान योग

Jnana Vijnana Yoga

30 पद/श्लोकपढ़ें
भगवद्गीता

अक्षर ब्रह्म योग

Akshara Brahma Yoga

28 पद/श्लोकपढ़ें
भगवद्गीता

राजविद्या राजगुह्य योग

Rajavidya Rajaguhya Yoga

34 पद/श्लोकपढ़ें
भगवद्गीता

विभूति योग

Vibhuti Yoga

42 पद/श्लोकपढ़ें
भगवद्गीता

विश्वरूप दर्शन योग

Vishwarupa Darshana Yoga

55 पद/श्लोकपढ़ें
भगवद्गीता

भक्ति योग

Bhakti Yoga

20 पद/श्लोकपढ़ें
भगवद्गीता

क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग

Kshetra Kshetrajna Vibhaga Yoga

35 पद/श्लोकपढ़ें
भगवद्गीता

गुणत्रय विभाग योग

Gunatraya Vibhaga Yoga

27 पद/श्लोकपढ़ें
भगवद्गीता

पुरुषोत्तम योग

Purushottama Yoga

20 पद/श्लोकपढ़ें
भगवद्गीता

दैवासुर सम्पद् विभाग योग

Daivasura Sampad Vibhaga Yoga

24 पद/श्लोकपढ़ें
भगवद्गीता

श्रद्धात्रय विभाग योग

Shraddhatraya Vibhaga Yoga

28 पद/श्लोकपढ़ें
भगवद्गीता

मोक्ष संन्यास योग

Moksha Sanyasa Yoga

78 पद/श्लोकपढ़ें

श्रीमद्भगवद्गीता के बारे में

श्रीमद्भगवद्गीता महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित सनातन परम्परा का अद्वितीय ग्रंथ है। इसे काल-कालान्तर से भक्तगण नित्य पाठ करते आए हैं। इस ग्रंथ का प्रत्येक पद आत्मिक उन्नति, धर्म, मोक्ष और भगवद-भक्ति की दिशा में मार्गदर्शक है।

ऊपर दिए गए अध्यायों पर क्लिक करके आप उनसे सम्बंधित समस्त चौपाई/श्लोकों का मूल पाठ, सरल हिन्दी अर्थ और विस्तृत व्याख्या पढ़ सकते हैं।