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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 103

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

कृपादृष्टि करि बृष्टि प्रभु अभय किए सुर बृंद। भालु कीस सब हरषे जय सुख धाम मुकुंद॥103॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

प्रभु श्री रामचंद्रजी ने कृपा दृष्टि की वर्षा करके देव समूह को निर्भय कर दिया। वानर-भालू सब हर्षित हुए और सुखधाम मुकुन्द की जय हो, ऐसा पुकारने लगे॥103॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 103 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik