ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 105

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

मंदोदरी आदि सब देह तिलांजलि ताहि। भवन गईं रघुपति गुन गन बरनत मन माहि॥105॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मंदोदरी आदि सब स्त्रियाँ उसे (रावण को) तिलांजलि देकर मन में श्री रघुनाथजी के गुण समूहों का वर्णन करती हुई महल को गईं॥105॥

आगे पढ़ें — लंका काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस

श्रीरामचरितमानस दोहा 105 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik