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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 107

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

सुनु सुत सदगुन सकल तव हृदयँ बसहुँ हनुमंत। सानुकूल कोसलपति रहहुँ समेत अनंत॥107॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

(जानकीजी ने कहा-) हे पुत्र! सुन, समस्त सद्गुण तेरे हृदय में बसें और हे हनुमान्‌! शेष (लक्ष्मणजी) सहित कोसलपति प्रभु सदा तुझ पर प्रसन्न रहें॥107॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 107 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik