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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 110

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

करि बिनती सुर सिद्ध सब रहे जहँ तहँ कर जोरि। अति सप्रेम तन पु‍लकि बिधि अस्तुति करत बहोरि॥110॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

विनती करके देवता और सिद्ध सब जहाँ के तहाँ हाथ जोड़े खड़े रहे। तब अत्यंत प्रेम से पुलकित शरीर होकर ब्रह्माजी स्तुति करने लगे-॥110॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 110 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik