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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 18

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

गयउ सभा दरबार तब सुमिरि राम पद कंज। सिंह ठवनि इत उत चितव धीर बीर बल पुंज॥18॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्री रामजी के चरणकमलों का स्मरण करके अंगद रावण की सभा के द्वार पर गए और वे धीर, वीर और बल की राशि अंगद सिंह की सी ऐंड़ (शान) से इधर-उधर देखने लगे॥18॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 18 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik