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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 1

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

अति उतंग गिरि पादप लीलहिं लेहिं उठाइ। आनि देहिं नल नीलहि रचहिं ते सेतु बनाइ॥1॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

बहुत ऊँचे-ऊँचे पर्वतों और वृक्षों को खेल की तरह ही (उखाड़कर) उठा लेते हैं और ला-लाकर नल-नील को देते हैं। वे अच्छी तरह गढ़कर (सुंदर) सेतु बनाते हैं॥1॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 1 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik