ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 20

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

प्रनतपाल रघुबंसमनि त्राहि त्राहि अब मोहि। आरत गिरा सुनत प्रभु अभय करेंगे तोहि॥20॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

और ‘हे शरणागत के पालन करने वाले रघुवंश शिरोमणि श्री रामजी! मेरी रक्षा कीजिए, रक्षा कीजिए।’ (इस प्रकार आर्त प्रार्थना करो।) आर्त पुकार सुनते ही प्रभु तुमको निर्भय कर देंगे॥20॥

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