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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 26

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

सेन सहित तव मान मथि बन उजारि पुर जारि। कस रे सठ हनुमान कपि गयउ जो तव सुत मारि॥26॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

सेना समेत तेरा मान मथकर, अशोक वन को उजाड़कर, नगर को जलाकर और तेरे पुत्र को मारकर जो लौट गए (तू उनका कुछ भी न बिगाड़ सका), क्यों रे दुष्ट! वे हनुमान्‌जी क्या वानर हैं?॥26॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 26 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik