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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 45

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

भुज बल रिपु दल दलमलि देखि दिवस कर अंत। कूदे जुगल बिगत श्रम आए जहँ भगवंत॥45॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

भुजाओं के बल से शत्रु की सेना को कुचलकर और मसलकर, फिर दिन का अंत होता देखकर हनुमान्‌ और अंगद दोनों कूद पड़े और श्रम थकावट रहित होकर वहाँ आ गए, जहाँ भगवान्‌ श्री रामजी थे॥45॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 45 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik