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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 46

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

देखि निबिड़ तम दसहुँ दिसि कपिदल भयउ खभार। एकहि एक न देखई जहँ तहँ करहिं पुकार॥46॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

दसों दिशाओं में अत्यंत घना अंधकार देखकर वानरों की सेना में खलबली पड़ गई। एक को एक (दूसरा) नहीं देख सकता और सब जहाँ-तहाँ पुकार रहे हैं॥46॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 46 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik