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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 51

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

जासु प्रबल माया बस सिव बिरंचि बड़ छोट। ताहि दिखावइ निसिचर निज माया मति खोट॥51॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

शिवजी और ब्रह्माजी तक बड़े-छोटे (सभी) जिनकी अत्यंत बलवान्‌ माया के वश में हैं, नीच बुद्धि निशाचर उनको अपनी माया दिखलाता है॥51॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 51 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik