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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 53

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

रुधिर गाड़ भरि भरि जम्यो ऊपर धूरि उड़ाइ। जनु अँगार रासिन्ह पर मृतक धूम रह्यो छाइ॥53॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

खून गड्ढों में भर-भरकर जम गया है और उस पर धूल उड़कर पड़ रही है (वह दृश्य ऐसा है) मानो अंगारों के ढेरों पर राख छा रही हो॥53॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 53 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik