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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 55

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

राम पदारबिंद सिर नायउ आइ सुषेन। कहा नाम गिरि औषधी जाहु पवनसुत लेन ॥55॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

सुषेण ने आकर श्री रामजी के चरणारविन्दों में सिर नवाया। उसने पर्वत और औषध का नाम बताया, (और कहा कि) हे पवनपुत्र! औषधि लेने जाओ॥55॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 55 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik