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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 58

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

देखा भरत बिसाल अति निसिचर मन अनुमानि। बिनु फर सायक मारेउ चाप श्रवन लगि तानि॥58॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

भरतजी ने आकाश में अत्यंत विशाल स्वरूप देखा, तब मन में अनुमान किया कि यह कोई राक्षस है। उन्होंने कान तक धनुष को खींचकर बिना फल का एक बाण मारा॥58॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 58 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik