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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 62

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

सुनि दसकंधर बचन तब कुंभकरन बिलखान। जगदंबा हरि आनि अब सठ चाहत कल्यान॥62॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

तब रावण के वचन सुनकर कुंभकर्ण बिलखकर (दुःखी होकर) बोला- अरे मूर्ख! जगज्जननी जानकी को हर लाकर अब कल्याण चाहता है?॥62॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 62 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik