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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 63

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

राम रूप गुन सुमिरत मगन भयउ छन एक। रावन मागेउ कोटि घट मद अरु महिष अनेक॥63॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्री रामचंद्रजी के रूप और गुणों को स्मरण करके वह एक क्षण के लिए प्रेम में मग्न हो गया। फिर रावण से करोड़ों घड़े मदिरा और अनेकों भैंसे मँगवाए॥63॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 63 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik