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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 66

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

जय जय जय रघुबंस मनि धाए कपि दै हूह। एकहि बार तासु पर छाड़ेन्हि गिरि तरु जूह॥66॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

‘रघुवंशमणि की जय हो, जय हो’ ऐसा पुकारकर वानर हूह करके दौड़े और सबने एक ही साथ उस पर पहाड़ और वृक्षों के समूह छोड़े॥66॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 66 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik