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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 75

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

रघुपति चरन नाइ सिरु चलेउ तुरंत अनंत। अंगद नील मयंद नल संग सुभट हनुमंत॥75॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्री रघुनाथजी के चरणों में सिर नवाकर शेषावतार श्री लक्ष्मणजी तुरंत चले। उनके साथ अंगद, नील, मयंद, नल और हनुमान आदि उत्तम योद्धा थे॥75॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 75 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik