ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 77

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

तब दसकंठ बिबिधि बिधि समुझाईं सब नारि। नस्वर रूप जगत सब देखहु हृदयँ बिचारि॥77॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

तब रावण ने सब स्त्रियों को अनेकों प्रकार से समझाया कि समस्त जगत्‌ का यह (दृश्य)रूप नाशवान्‌ है, हृदय में विचारकर देखो॥77॥

आगे पढ़ें — लंका काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस

श्रीरामचरितमानस दोहा 77 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik