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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 81

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

निज दल बिचलत देखेसि बीस भुजाँ दस चाप। रथ चढ़ि चलेउ दसानन फिरहु फिरहु करि दाप॥81॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अपनी सेना को विचलित होते हुए देखा, तब बीस भुजाओं में दस धनुष लेकर रावण रथ पर चढ़कर गर्व करके ‘लौटो, लौटो’ कहता हुआ चला॥81॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 81 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik