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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 84

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

उहाँ दसानन जागि करि करै लाग कछु जग्य। राम बिरोध बिजय चह सठ हठ बस अति अग्य॥84॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

वहाँ (लंका में) रावण मूर्छा से जागकर कुछ यज्ञ करने लगा। वह मूर्ख और अत्यंत अज्ञानी हठवश श्री रघुनाथजी से विरोध करके विजय चाहता है॥84॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 84 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik