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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 87

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

बीर परहिं जनु तीर तरु मज्जा बहु बह फेन। कादर देखि डरहिं तहँ सुभटन्ह के मन चेन॥87॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

वीर पृथ्वी पर इस तरह गिर रहे हैं, मानो नदी-किनारे के वृक्ष ढह रहे हों। बहुत सी मज्जा बह रही है, वही फेन है। डरपोक जहाँ इसे देखकर डरते हैं, वहाँ उत्तम योद्धाओं के मन में सुख होता है॥87॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 87 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik