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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 90

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

राम बचन सुनि बिहँसा मोहि सिखावत ग्यान। बयरु करत नहिं तब डरे अब लागे प्रिय प्रान॥90॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्री रामजी के वचन सुनकर वह खूब हँसा (और बोला-) मुझे ज्ञान सिखाते हो? उस समय वैर करते तो नहीं डरे, अब प्राण प्यारे लग रहे हैं॥90॥

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