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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 91

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

तानेउ चाप श्रवन लगि छाँड़े बिसिख कराल। राम मारगन गन चले लहलहात जनु ब्याल॥91॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

धनुष को कान तक तानकर श्री रामचंद्रजी ने भयानक बाण छोड़े। श्री रामजी के बाण समूह ऐसे चले मानो सर्प लहलहाते (लहराते) हुए जा रहे हों॥91॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 91 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik