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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 93

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

पुनि दसकंठ क्रुद्ध होइ छाँड़ी सक्ति प्रचंड। चली बिभीषन सन्मुख मनहुँ काल कर दंड॥93॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

फिर रावण ने क्रोधित होकर प्रचण्ड शक्ति छोड़ी। वह विभीषण के सामने ऐसी चली जैसे काल (यमराज) का दण्ड हो॥93॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 93 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik