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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 94

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

उमा बिभीषनु रावनहि सन्मुख चितव कि काउ। सो अब भिरत काल ज्यों श्री रघुबीर प्रभाउ॥94॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

(शिवजी कहते हैं-) हे उमा! विभीषण क्या कभी रावण के सामने आँख उठाकर भी देख सकता था? परन्तु अब वही काल के समान उससे भिड़ रहा है। यह श्री रघुवीर का ही प्रभाव है॥94॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 94 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik