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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 95

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

तब रघुबीर पचारे धाए कीस प्रचंड। कपि बल प्रबल देखि तेहिं कीन्ह प्रगट पाषंड॥95॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

तब श्री रघुवीर के ललकारने पर प्रचण्ड वीर वानर दौड़े। वानरों के प्रबल दल को देखकर रावण ने माया प्रकट की॥95॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 95 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik