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श्रीरामचरितमानस · लंका काण्ड

लंका काण्ड दोहा 9

लंका काण्ड · Lanka Kaand

मूल पाठ

नारि पाइ फिरि जाहिं जौं तौ न बढ़ाइअ रारि। नाहिं त सन्मुख समर महि तात करिअ हठि मारि॥9॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

यदि वे स्त्री पाकर लौट जाएँ, तब तो (व्यर्थ) झगड़ा न बढ़ाइये। नहीं तो (यदि न फिरें तो) हे तात! सम्मुख युद्धभूमि में उनसे हठपूर्वक (डटकर) मार-काट कीजिए॥9॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 9 लंका काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik