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श्रीरामचरितमानस · सुन्दर काण्ड

सुन्दर काण्ड दोहा 38

सुन्दर काण्ड · Sundar Kaand

मूल पाठ

काम क्रोध मद लोभ सब नाथ नरक के पंथ। सब परिहरि रघुबीरहि भजहु भजहिं जेहि संत॥38॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे नाथ! काम, क्रोध, मद और लोभ- ये सब नरक के रास्ते हैं, इन सबको छोड़कर श्री रामचंद्रजी को भजिए, जिन्हें संत (सत्पुरुष) भजते हैं॥38॥

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