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श्रीरामचरितमानस · सुन्दर काण्ड

सुन्दर काण्ड दोहा 44

सुन्दर काण्ड · Sundar Kaand

मूल पाठ

उभय भाँति तेहि आनहु हँसि कह कृपानिकेत। जय कृपाल कहि कपि चले अंगद हनू समेत॥44॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

कृपा के धाम श्री रामजी ने हँसकर कहा- दोनों ही स्थितियों में उसे ले आओ। तब अंगद और हनुमान्‌ सहित सुग्रीवजी ‘कपालु श्री रामजी की जय हो’ कहते हुए चले॥44॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 44 सुन्दर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik