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श्रीरामचरितमानस · सुन्दर काण्ड

सुन्दर काण्ड दोहा 48

सुन्दर काण्ड · Sundar Kaand

मूल पाठ

सगुन उपासक परहित निरत नीति दृढ़ नेम। ते नर प्रान समान मम जिन्ह कें द्विज पद प्रेम॥48॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जो सगुण (साकार) भगवान्‌ के उपासक हैं, दूसरे के हित में लगे रहते हैं, नीति और नियमों में दृढ़ हैं और जिन्हें ब्राह्मणों के चरणों में प्रेम है, वे मनुष्य मेरे प्राणों के समान हैं॥48॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 48 सुन्दर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik