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श्रीरामचरितमानस · सुन्दर काण्ड

सुन्दर काण्ड दोहा 54

सुन्दर काण्ड · Sundar Kaand

मूल पाठ

द्विबिद मयंद नील नल अंगद गद बिकटासि। दधिमुख केहरि निसठ सठ जामवंत बलरासि॥54॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

द्विविद, मयंद, नील, नल, अंगद, गद, विकटास्य, दधिमुख, केसरी, निशठ, शठ और जाम्बवान्‌ ये सभी बल की राशि हैं॥54॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 54 सुन्दर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik