ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीरामचरितमानस · सुन्दर काण्ड

सुन्दर काण्ड दोहा 57

सुन्दर काण्ड · Sundar Kaand

मूल पाठ

बिनय न मानत जलधि जड़ गए तीनि दिन बीति। बोले राम सकोप तब भय बिनु होइ न प्रीति॥57॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

इधर तीन दिन बीत गए, किंतु जड़ समुद्र विनय नहीं मानता। तब श्री रामजी क्रोध सहित बोले- बिना भय के प्रीति नहीं होती!॥57॥

आगे पढ़ें — सुन्दर काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस