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श्रीरामचरितमानस · सुन्दर काण्ड

सुन्दर काण्ड दोहा 58

सुन्दर काण्ड · Sundar Kaand

मूल पाठ

काटेहिं पइ कदरी फरइ कोटि जतन कोउ सींच। बिनय न मान खगेस सुनु डाटेहिं पइ नव नीच॥58॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

(काकभुशुण्डिजी कहते हैं-) हे गरुड़जी! सुनिए, चाहे कोई करोड़ों उपाय करके सींचे, पर केला तो काटने पर ही फलता है। नीच विनय से नहीं मानता, वह डाँटने पर ही झुकता है (रास्ते पर आता है)॥58॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 58 सुन्दर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik